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०४ एप्रिल २०२२

चंद्रपूर में अवकाश से गिरनेवाले अवशेष चीन के चेंग झेंग 3बी वाई77 रॉकेट के

नागपूर/ललित लांजेवार:
देश के कही हिस्सो मे शनिवार कि शाम करीब ८ बजे आसमान में चमकती रहस्यमय रोशनी की एक कतार ने लोगों को अचरज में डाल दिया था. शाम ८ बजे से कुछ देर पहले यह रोशनी आसमान में दिखाई दी थी.वह रोशनी चीन के चेंग झेंग 3बी वाई77 रॉकेट के तिसरे स्टेज का हिस्सा होणे का खुलासा अमेरिकी साइंटिस्ट जोनाथन मैकडॉवल किया है.
महाराष्ट्र के चंद्रपूर जिल्हे के सिंदेवाही तालुकाकें लाडबोरी गाव मे चमचमती रोशनी के साथ नीचे आने वाले अवशेष मिले. यह अवशेष मिलने के बाद खगोल अभ्यासक अभ्यास में जूट गये थे. खगोल अभ्यासक सचिन वझलवार ने जोनाथन मैकडॉवल को फोटो ट्विट कर जाणकारी दि थी.
मैकडॉवल ने फोटो उपलोड करते ट्विट किया कि वह अवशेष चायनीज रॉकेट के होने का दावा किया. लेकिन रविवार को इस घटना का खुलासा करणे के लिये दुसरीबार खबरबात डिजिटल मीडिया 
के संपादक ललित लांजेवार ने मैसाचुसेट्स के कैंब्रिज में हार्वर्ड स्मिथसन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिक जोनाथन मैकडॉवल को ट्विटरपर ट्विट करके पूछा कि भारतीय लोगोके मन में अभिभि संभ्रम है कि यह रॉकेट के अवशेष न्यूझीलंड के है या चीन के ?
photo:Jonathan McDowell
ऊसपर जवाब देते कहा कि बीलकूल यह अवशेष चायनीज रॉकेट के हि है. भेजे गये फोटो को देखणे के बाद उन्होने बताया कि यह ३ मीटर कि रिंग चायना के चेंग झेंग 3बी वाई77 रॉकेट के तिसरे स्टेज का हिस्सा है जो चायना ने फरवरी २०२१ में अंतरिक्ष में भेजा था.

फरवरी २०२१ में प्रक्षेपण के बाद रॉकेट ऊर्ध्वाधर कक्षा में चल रहा था, जिसकी पेरीजी 150 किमी और अपोजी 34440 किमी था।लेकिन जब रॉकेट पेरीजी से गुजरता है तो वायुमंडल से खींचे जाने के कारण इसमें कुछ ऊर्जा कम हो जाती है,ऊर्जा कमी होणे के कारण यह रॉकेट अपनी कक्षा से भटक गया और चंद्रपूर के सिंदेवाही इलाके में गिरा.

जब तक रॉकेट पुन: प्रवेश नहीं करता तब तक अपोजी लगातार कम होते जाती है ऐसे वैज्ञानिक जोनाथन मैकडॉवल का कहना है. इसी लिये रॉकेट का थर्ड स्टेज का हिस्सा वापस धरती की तरफ गिरते हुए आया.और वातावरण में संपर्क में आने से जल उठा. जो खुली जगह या समुद्र में गिरणा था.
लेकिन वह महाराष्ट्र के चंद्रपूर जिल्हे के सिंदेवाही तालुकाकें लाडबोरी गाव मे गिरा तो कुछ इंधन के खाली सिलेंडर आजूबाजू के जिल्हे में गिरे जिसमेसे एक वर्धा के समुद्रपूर के वाघेडा ढोक गाव के खेत में गिरा.
फीलहाल चंद्रपूर और वर्धा में ईसके अवशेष मिले है लेकिन जिस गती और दिशा से यह आग के गोल जमीन कि और आणे लगे थे इस अंदाज से विदर्भ के और इलाको मे यह अवशेष बिखरे पडे होणे कि आशंका जाताई जा रही है.
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