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शुक्रवार, डिसेंबर २४, २०२१

अटल बिहारी वाजपेयी: सुशासन के पर्याय | Atal Bihari Vajpayee : Synonyms to Sushasana

 अटल बिहारी वाजपेयी : सुशासन के पर्याय

सुशासन ऐसी धरोहर है जिसे भारत की प्राचीन संस्कृति और लोकाचार से आत्मसात् किया गया है। बौद्ध धर्म के गण संघ, भगवान बासवेश्वकर द्वारा 11वीं शताब्दी ईस्वी में स्थापित अनुभव मंडप, चाणक्य के अर्थशास्त्र, सिधुं घाटी सभ्यता के दौरान नगर योजना, मौर्य सम्राट अशोक की धरोहर के और अन्यत माध्यमों से पुनः संचित प्रजातांत्रिक मूल्य बेहतर सुशासन हेतु विरासत में मिले ज्ञान भंडार हैं। श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को मनाने हेतु सुशासन दिवस के अवसर पर, यह अत्यावश्यक है कि हम स्वततंत्र भारत में सर्वोत्तम सुशासन उपायों को संस्थागत बनाने में उनकी असाधारण भूमिका पर प्रकाश डालें और उसे आज के संदर्भ में ग्रहण करें।    

स्वतंत्रता के बाद, सुशासन का मुद्दा शासन संबंधी सुधारों का केन्द्र बिन्दु रहा, परन्तु ऐसा केवल बातचीत के स्तर पर ही होता रहा। संविधान सभा के वाद-विवाद में या योजना आयोग जैसी संस्थाओं में, विधिवत रूप से तैयार की गई नीति परिचर्चा केवल कागजों में ही सिमटी रही और इन्हें कार्यान्वित करने हेतु कारगर उपाय नहीं किए जा सके। श्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व और राजनैतिक कौशल के साथ, हमारा देश ऐतिहासिक सुशासन प्रयासों का साक्षी बना जिनसे जनता के जीवन में समृद्धि आई। 

लोक सभा सदस्य के रूप में दस कार्यकाल और राज्य सभा सदस्य के रूप में दो कार्यकाल पूरे करने वाले श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सांसद के रूप में अपनी कार्यावधि के दौरान सुशासन की बारीकियों पर प्रकाश डाला। नेता, प्रतिपक्ष के रूप में उनकी तर्कसंगत दलीलों और रचनात्मक समालोचनाओं में कल्यााण-केन्द्रित सुशासन तंत्र के लिए प्रेरित करने का बल था। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, उनकी जनोन्मुखी पहलें नये भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित हुईं। उनके द्वारा किसानों के जीवन में सुधार लाने के लिए प्रारंभ किए गए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के द्वारा अवसरंचनात्म्क संवर्धन, नदियों को आपस में जोड़ने तथा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम की अवधारणा तैयार करना, सर्व शिक्षा अभियान के माध्य्म से शैक्षिक सुधार, पृथक जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन आदि ऐसे कुछ उपाय हैं जिन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग को प्रभावित किया। अर्द्ध-न्यायिक केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग की स्थापना की गई और विद्युत क्षेत्र में वर्षों पुराने विद्युत अधिनियम में संशोधन किया गया ताकि विनियामक रूपरेखा में सुधार किया जा सके। 

मई, 1998 में, पोखरण, राजस्था्न में उनकी राष्ट्रीय शासन कार्यसूची के भाग के रूप में किए गए परमाणु परीक्षणों के कारण भारत का नाम परमाणु शक्ति संपन्न देशों में शामिल हो गया। कश्मीर की जटिल समस्या का समाधान करने के लिए वाजपेयी जी के मानवता, शांति और कश्मीरी लोगों के आत्मसम्मान को कायम रखने हेतु प्रसिद्ध सिद्धांत ‘इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत‘ में उनकी लोकप्रिय बौद्धिकता प्रतिबिंबित होती है। विदेश नीति से संबंधित उनके ये विचार कि ‘आप मित्र बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं‘, सभी मंचों पर भागीदारी का निरन्तर स्रोत रहे हैं। मां भारती की रक्षा में अपने प्राणों की आहूति देने वाले हमारे वीर सैनिकों के पार्थिव शव उनके परिवारजनों को सौंपने का निर्णय भी अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार द्वारा किया गया ताकि मातृभूमि की रक्षा में अपना बलिदान देने वाले शहीदों का अंतिम संस्कार उनके परिवारजनों के द्वारा सम्मानपूर्वक किया जा सके। अटल जी, आपसी सामंजस्य में विश्वास रखने वाले यथार्थवादी राजनेता थे और यह तथ्य इस बात से प्रकट होता है कि वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में से शांतिपूर्ण रूप से क्रमशः छत्तीेसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड नामक तीन नए राज्यों की स्थापना की गई। यह सरकार को जनता के निकट ले जाकर सुशासन स्थापित करने का एक सुविचारित प्रयास था।  

वह डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के विचारों की भविष्योन्मुखी अंतर्दृष्टि से अत्यंत प्रभावित थे। अटल बिहारी वाजपेयी जी और लाल कृष्ण आडवाणी जी के प्रयास से ही वी. पी. सिंह सरकार ने भाजपा के समर्थन से डॉ. भीमराव अम्बेडकर को 31 मार्च, 1990 को भारत रत्न से सम्मानित किया। अटल बिहारी वाजपेयी जी की इच्छानुसार दिल्ली स्थित 26 अलीपुर रोड, जहां सिरोही, राजस्थान के महाराजा ने डॉ. अम्बेडकर को केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा (1951) देने के पश्चात रहने के लिए आमंत्रित किया था, को संग्रहालय के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई गई जिससे लोगों को सामाजिक समता के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। डॉ. अम्बेेडकर ने इसी स्थान पर अपनी अंतिम सांस ली थी। शहरी विकास मंत्रालय द्वारा वाजपेयी जी की देखरेख में 14 अक्तूबर, 2003 को निजी संपत्ति के विनिमय विलेख पर हस्ताक्षर किए गए और दिसम्बर, 2003 में विकास कार्य शुरू किया गया। बाद में यूपीए के कार्यकाल के दौरान इस परियोजना को रोक दिया गया। मोदी सरकार ने इसे 100 करोड़ रुपए की लागत पर डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किया और 13 अप्रैल, 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया।       

अटल बिहारी वाजपेयी ने 21वीं शताब्दी के प्रारंभ होते ही कई पहलों के साथ सुशासन अभियान को शुरु कर दिया था। अब इस अभियान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और नए भारत (न्यू इंडिया) को 21वीं शताब्दी का वैश्विक नेता बनाने के लिए इसे तेज गति के साथ आगे बढ़ाया है। डीबीटी, जेएएम ट्रिनिटी, फेसलैस टैक्सेाशन जैसी प्रौद्योगिक युक्तियों और इन्हीं के समान अन्य कार्य योजनाओं को कार्यान्वित करने से विवेकाधीन संसाधनों के कम उपयोग की संभावना बनी है, जिसके फलस्वरूप ऐसी संस्थाओं में लोगों का विश्वायस बढ़ा है। जहां किसान क्रेडिट कार्डों का दायरा बढ़ा है वहीं कृषि से संबंधित कार्यकलापों का निगमीकरण हुआ है। भारतमाला, सागरमाला, राष्ट्रीय परिसंपत्ति, नेशनल ऐसेट मोनेटाइनेशन पाइपलाइन, कृषि अवसंरचना निधि और पीएमजीएसवाई चरण-प्प्प् के विस्तारण के कारण निर्माण क्षेत्र को अत्यधिक बढ़ावा मिला है। अनुच्छे्द 370 अर्थात् जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की समाप्ति के फलस्वरूप जम्मू और कश्मीर में प्रभावी और दक्ष सेवाओं से संबंधित संवितरण कार्य तंत्र (डिलीवरी मकैनिज्म) के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। अब प्रत्येक वर्ग के लोगों को विकास कार्य सूची के दायरे में लाया जा रहा है। 

‘सरकार की न्यूनतम भूमिका और सुशासन की अधिकतम मात्रा’ (मिनिमम गवर्न्मेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस) नामक इस मंत्र से नागरिकों के बीच जीवन की सहज अनुभूति हुई है। संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा व्यापारियों, व्यक्तियों और अन्य हितधारकों पर अनुपालन का भार कम करने पर विशेष ध्यान देकर ‘मिशन कर्मयोगी‘ के माध्यम से प्रधानमंत्री गति‍शक्ति, प्रगति क्षमता निर्माण जैसी पहलों सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के द्वारा सुशासन संबंधी बाधाओं का निराकरण बेहतर सेवा संवितरण सुनिश्चित करेगा। जीएसटी, श्रमिक संहिताओं, दिवाला और वंचन संहिता, नयी शिक्षा नीति, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान और कर संबंधी विवादों के निर्बाध समाधान कार्य कुछ ऐसे अन्यस पहलू हैं जिनसे पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के अन्य आयाम सुदृढ़ हो रहे हैं। यह ऐसे किए गए उपायों का ही प्रमाण है कि आज भारत सहज व्यवसाय संचालन के क्षेत्र में वर्ष 2015 में 145 से 79वें स्थान पर और वर्ष 2020 में 63वें स्थान पर पहुंच गया है। इसी प्रकार भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में वर्ष 2015 में 81वें स्थान से वर्ष 2021 में 46वें स्थान पर पहुंच गया है। हाल ही में 8 दिसंबर को केंद्रीय मंत्री परिषद द्वारा केन-बेतवा अंतर संबद्ध परियोजना को मंजूर किए जाने से यह परियोजना अतिशेष जल क्षेत्रों से सूखाग्रस्त और अल्प जल मात्रा वाले क्षेत्रों में जल पहुंचाने वाली पहली प्रमुख केंद्र संचालित परियोजना बन गई है, जिससे अटल जी का देखा सपना साकार हो रहा है। 

समाज, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय विकास श्रृंखलाओं से जुड़ा हुआ हैं। इसी प्रकार सुशासन संबंधी सुधारों को कार्यान्वित करने के लिए समानता होना आवश्यक है ताकि सभी हितधारकों के कल्याण के लिए इन रचनात्मक परिवर्तनों को उपयोग में लाया जा सके। मोदी सरकार द्वारा समयबद्ध ढंग से योजनाओं को लागू करना वस्तुतः एक उल्लेखनीय उपलब्धि है जिसके फलस्वरूप अब तक बहुत-सी ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हुई हैं। कहा जाता है कि सुधार के लिए हमेशा गुंजाइश रहती है, इसलिए बहुत-से महत्वपूर्ण सुधार कार्य अनवरत रूप से किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने एक साथ चुनाव कराने, एकल चुनाव पंजिबनाने और राष्ट् के सर्वाधिक हित में बहुत-से मंचों पर अखिल भारतीय न्यायिक सुधारों के प्रति अपनी चिंता अभिव्यंक्त की है। सुधार प्रक्रियों पर तेजी से अमल करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों के बीच संघीय और राजनीतिक स्तरों पर उचित परामर्श किए जा रहे हैं। 

अच्छे् सुशासन से अभिप्रेत, सुसंस्थापित संवैधानिक कार्ययोजना के माध्यम से लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में कदम उठाते हुए उनकी अपरिहार्य रूप में सेवा करने से है। अटल जी का दृष्टिकोण, नेतृत्व, मार्गदर्शन और उनकी अमूल्य अंतर्दृष्टि वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए हमेशा ही प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। चूंकि, राष्ट्र आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान सुशासन दिवस मना रहा है, इसलिए आवश्यक है कि हम रु न्यू इंडिया का निर्माण करने के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना से काम करने के लिए अपना आत्मविश्लेषण करते हुए शपथ लें।  


- अर्जुन राम मेघवाल, 

केन्द्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री, भारत सरकार एवं लोकसभा सांसद, 

बीकानेर 



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