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१७ ऑगस्ट २०२०

तबादले के संबंध में न्यायालय में न्याय मांगने का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का मुख्यमंत्री को इशारा।







कोरोना महामारी के कारण राज्य के गंभीर संकट में होने के बावजूद तबादले की अनुमति देते समय राज्य सरकार ने मनमानी से अपनी नीति को बदल दिया है । कोरोना की रोकथाम के लिए किये जा रहे विभिन्न उपायों में निरंतरता नहीं होने से जनता का जीवन संकट में आ गया है। तबादले का कानून भंग हुआ है, राज्य का आर्थिक नुकसान हुआ है व तबादले का बाजार बनाकर बड़े पैमाने पर आर्थिक व्यवहार हुआ है। तबादलों की सीआईडी जांच का आदेश दिया जाये, अन्यथा न्यायालय में न्याय मांगना पड़ेगा , ऐसा इशारा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मा. चंद्रकांतदादा पाटील ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजे गए पत्र में किया है ।

मा. चंद्रकांतदादा पाटील ने सोमवार के दिन मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा है कि, राज्य सरकार के वित्त विभाग ने दिनांक 4 मई के दिन सरकारी आदेश को जारी किया, जिसमें कोरोना के कारण तबादले न किये जाए, ऐसा कहा गया था। लेकिन इस संबंध में 7 जुलाई के दिन सरकारी आदेश जारी करते समय सामान्य प्रशासन विभाग ने पंद्रह प्रतिशत तबादले करने की अनुमति दी। राज्य सरकार की नीति को मनमाने ढंग से बदला गया। साथ ही कोरोना के संबंध में उपाय योजनाओं में निरंतरता नही रखी गई।

उन्होंने कहा कि, पंद्रह प्रतिशत तबादले की अनुमति देते समय 31 मई तक सामान्य तबादले करने के बारे में स्पष्ट कहा गया था । इसके बावजूद तबादले करने की दी गई 31 जुलाई तक की समयसीमा और इसके बाद बढ़ाई गई 10 अगस्त की समयसीमा के आधार को लेकर 31 मई तक जिस भी अधिकारी-कर्मचारी की 3 साल की समयसीमा समाप्त नही हो रही थी उन्हें भी हटा दिया गया और रिक्त स्थान पर अपनी पसंद के अधिकारियों को लाया गया। जिसमें तबादले के नियमों को भंग किया गया ।

उन्होंने कहा कि, तबादले के नियम के अनुसार तीन आईएएस अधिकारियों की आस्थापन समिति तबादले का प्रस्ताव करती है और यदि इसमें बदलाव करना हो तो संबंधित मंत्री को कारण के बारे लिखना होता है इसके पश्चात ही मुख्यमंत्री हस्ताक्षर करते हैं। तीन वर्ष पूरा नहीं हुआ और ऐसे ही तबादला करना हो तब भी मंत्री को कारण लिखित में दर्ज करना होता है और अंतिम हस्ताक्षर मुख्यमंत्री को करने का नियम होता है । इस समय यह प्रक्रिया अपनाई गई क्या, इसका खुलासा सबके सामने होने की आवश्यकता है। इससे संबंधित सभी फाइल जनता के सामने खोलने का आदेश दें । साथ ही तबादला करने के नियमों को भंग किसने किया इसकी जिम्मेदारी निश्चित की जाये ।

उन्होंने कहा कि, राज्य की आर्थिक स्थिति कोरोना के कारण गंभीर होने से वित्त विभाग ने विभिन्न खर्चों पर प्रतिबंध लगाया हुआ था। मार्च महीने का पूरा पगार भी नहीं दिया गया है। लेकिन तबादले की अनुमति देकर तबादला हुए अधिकारी- कर्मचारियों को तबादले का भत्ता देने का बड़ा खर्च राज्य सरकार ने किया है ।इस प्रकरण में राज्य सरकार पर कितना वित्तीय दबाव पड़ा है यह घोषित करे ।