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१६ नोव्हेंबर २०१९

यातायात के पर्यायी साधन के रूप मे Metro का उपयोग




• *एक उपयुक्त पर्यायी यातायात साधन
 
*नागपुर १६ :* मेट्रो नियो यात्रियो के लिए एक योग्य मोबिलिटी पर्याय है, बडे और महत्वपूर्ण शहरो मे भीड भाड के समय यातायात के पर्यायी साधन के रूप मे इसका उपयोग किया जा सकता है, यह विश्वास महा मेट्रो के प्रबंध निदेशक डॉ ब्रिजेश दीक्षित ने जताया है, वे १२ वां ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया परिषद के दुसरे दिन आयोजित गोलमेज बैठक मे बैठक मे `सभी के लिए सार्वजनिक परिवहन विषय पर बोल रहे थे ! 

डॉ. दीक्षित ने कहां की मेट्रो नियो प्रकल्प यह उन शहरो के लिए बेहद उपयोगी है, जहां भीड के दौरान ५,००० से १५,००० यात्री यात्रा करते है ! मेट्रो नियो प्रकल्प परिपूर्ण है, और इस परियोजना पर होने वाला खर्च अन्य साधनो के मुकाबले काफी कम है ! देश मे मेट्रो वाहन के अलावा `लाईट मेट्रो' (मेट्रो नियो) यह यातायात का समाधानकारक पर्याय है, और सभी वर्ग के लिए उपयुक्त है ! 

राज्य सरकार ने नासिक के लिए `मास ट्रांजीट सिस्टम' अंतर्गत मेट्रो नियो को मंजुरी प्रदान की है ! महा मेट्रो को इस प्रकल्प को लागू करने कि जिम्मेदारी सौपी गई है ! पुरे देश मे मेट्रो नियो परियोजना का पहला प्रयोग नासिक मे किया जा रहा है ! नासिक यहां सुरक्षित विश्वसनीय और आरामदायी सार्वजनिक प्रवासी यातायात को गती देने कि जिम्मेदारी महा मेट्रो को राज्य शासन ने नवंबर २०१८ को सौपी है ! 

सामान्यतः २०-३० लाख लोकसंख्या के शहरो मे यातायात व्यवस्था निर्माण के लिए विभिन उपायो पर केंद्र सरकार विचार कर रही है ! अनेक पर्यायो का विचार करने के बाद केंद्र सरकारने २१ अगस्त २०१९ को महा मेट्रो के प्रबंध निदेशक डॉ. ब्रिजेश दीक्षित कि अध्यक्षता मे एक समिती स्थापित की है ! टायर पर दौडनेवाली तेज गती की सार्वजनिक यातायात व्यवस्था निर्माण करने संबंधी सभी बातो पर विचार करने के लिए तथा एक सूत्र लाने के लिए यह समिती बनाई गयी है ! 

महा मेट्रो की ओर से लागू किए जाने वाले इस अनोखे मेट्रो नियो परियोजना कि, विस्तृत जानकारी देने के लिए लखनऊ मे इस बैठक का आयोजन किया गया ! परियोजना पर विस्तृत चर्चा करने के बाद महा मेट्रो के कार्यो की उपस्थिततो ने सराहना की ! इस बैठक मे  श्री. दुर्गा शंकर मिश्रा, सचिव (शहरी विकास) मंत्रालय, भारत सरकार, श्री. राजेंद्र कुमार तिवारी,(मुख्य सचिव,उत्तर प्रदेश) श्री. प्रसन्ना पटवर्धन, संचालक (प्रसन्ना पर्पल), डॉ. एव्सेल फ्रेडरिच (जर्मन पर्यावरण एजंसी), श्री. आर. के. मिश्रा (अध्यक्ष–युलो बाईव्स) उपस्थित थे !